लंबे समय से जब भी “हाई-प्रोटीन नाश्ता” की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में अंडों की तस्वीर आती है। जिम जाने वाले हों, वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोग हों या फिटनेस के प्रति जागरूक युवा — लगभग हर किसी को यही बताया जाता है कि सुबह अंडे खाना ज़रूरी है। ये आज के दौर में सभी जगह देखा गया है।
लेकिन सच तो ये है कि भारत जैसे विविध खान-पान वाले देश में प्रोटीन का स्रोत सिर्फ अंडे या मांस तक सीमित नहीं है। हमारी पारंपरिक भारतीय रसोई में ऐसे कई नाश्ता मौजूद हैं जो न केवल अंडों के बराबर बल्कि कई बार उनसे भी अधिक प्रोटीन प्रदान करते हैं। जी है ये बिलकुल सही है।
दालें, अनाज, दही, अंकुरित अनाज और खमीर वाले घोल से बने भारतीय नाश्ते सदियों से हमारे खान-पान का हिस्सा रहे हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा, बेहतर पाचन, और लंबी तृप्ति देते हैं। यही कारण है कि पुराने समय में लोग कम खाते थे, लेकिन ज़्यादा देर तक स्वस्थ और बलवान रहते थे।
शरीर को रोज़ाना कितने प्रोटीन की ज़रूरत होती है?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक औसत वयस्क व्यक्ति को रोज़ाना अपने शरीर के वजन के प्रति किलो ग्राम पर लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।
उदाहरण के लिए:
- 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को लगभग 48–60 ग्राम प्रोटीन
- 70 किलो वजन वाले व्यक्ति को लगभग 56–70 ग्राम प्रोटीन
दिनभर में लेना चाहिए।
अगर दिन की शुरुआत प्रोटीन से भरपूर नाश्ते से हो जाए, तो:
- शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है
- मांसपेशियों की मरम्मत और निर्माण में मदद मिलती है
- बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है
- मीठा या जंक फूड खाने की इच्छा घटती है
अब आइए जानते हैं ऐसे 8 पारंपरिक भारतीय नाश्तों के बारे में, जो अंडों के बराबर या उससे भी ज़्यादा प्रोटीन दे सकते हैं। उसे डिटेल्स में जानते है।
1. मूंग दाल चीला
प्रोटीन: 14–16 ग्राम (2 मध्यम चीले)
मूंग दाल चीला भारतीय घरों में बहुत पुराना और भरोसेमंद नाश्ता है। पीली मूंग दाल न केवल प्रोटीन से भरपूर होती है, बल्कि यह पचने में भी हल्की मानी जाती है।
कैसे बनता है?
पीली मूंग दाल को 3–4 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद इसे अदरक और हरी मिर्च के साथ पीसकर चिकना घोल बना लें। स्वाद के लिए नमक, बारीक कटा प्याज़ या हरा धनिया मिलाया जा सकता है।
गर्म तवे पर थोड़ा सा तेल लगाकर घोल फैलाएँ और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें।
फायदे:
- लंबे समय तक पेट भरा रहता है
- डायबिटीज़ के मरीजों के लिए अच्छा
- वजन घटाने में सहायक
- सुबह के समय पेट पर भारी नहीं पड़ता
दही या पुदीना चटनी के साथ यह नाश्ता और भी पौष्टिक बन जाता है।
2. बेसन चीला
प्रोटीन: 12–14 ग्राम प्रति सर्विंग
बेसन यानी चने का आटा भारतीय रसोई का एक बेहद उपयोगी घटक है। इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है।
कैसे बनाएं?
बेसन में पानी, हल्दी, मिर्च पाउडर और नमक मिलाकर चिकना घोल तैयार करें। इसमें प्याज़, टमाटर, पालक या गाजर मिलाने से स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।
थोड़ा नींबू रस या एक चम्मच दही डालने से चीला अंदर से नरम बनता है। अजवाइन या जीरा पाचन को बेहतर बनाते हैं।
फायदे:
- पेट देर तक भरा रहता है
- कब्ज की समस्या में राहत
- शाकाहारी लोगों के लिए बेहतरीन प्रोटीन स्रोत
3. पनीर भुर्जी (मल्टीग्रेन रोटी के साथ)
प्रोटीन: 18–20 ग्राम प्रति सर्विंग
पनीर भारतीय शाकाहारी प्रोटीन का राजा माना जाता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो जिम जाते हैं या मांसपेशियां बढ़ाना चाहते हैं।
कैसे बनाएं?
एक चम्मच तेल में प्याज़, टमाटर और हरी मिर्च भूनें। हल्दी और जीरा डालें। अब ताज़ा पनीर को मसलकर डालें और 3–4 मिनट पकाएँ।
फायदे:
- मांसपेशियों को मजबूती
- बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए उपयोगी
- कैल्शियम और प्रोटीन दोनों का अच्छा स्रोत
इसे मल्टीग्रेन रोटी या ब्राउन ब्रेड के साथ खाने से पोषण और बढ़ जाता है।
4. अंकुरित मूंग सलाद / उसल
प्रोटीन: 14–15 ग्राम प्रति कटोरी
अंकुरित अनाज पोषण का खजाना होते हैं। अंकुरण की प्रक्रिया से पोषक तत्व शरीर में आसानी से अवशोषित होते हैं।
कैसे खाएं?
हरी मूंग को रातभर भिगोकर एक दिन अंकुरित होने दें। चाहें तो हल्का उबाल लें या कच्चा सलाद बनाकर खाएं।
फायदे:
- पाचन तंत्र मज़बूत
- इम्युनिटी बढ़ाने में मदद
- वजन घटाने वालों के लिए आदर्श
5. अडई डोसा (मिक्स दाल डोसा)
प्रोटीन: 16–18 ग्राम (2 डोसे)
दक्षिण भारत का यह पारंपरिक नाश्ता कई दालों से मिलकर बनता है, जिससे इसका प्रोटीन स्तर काफी ऊँचा होता है।
कैसे बनता है?
अरहर, चना, उड़द दाल और थोड़ा चावल भिगोकर दरदरा पीस लें। बिना ज़्यादा खमीर के यह डोसा बनाया जाता है।
फायदे:
- ग्लूटन कम
- लंबे समय तक ऊर्जा
- बच्चों के लिए भी पौष्टिक
6. हंग कर्ड पारफे (गाढ़ा दही)
प्रोटीन: 17–20 ग्राम प्रति सर्विंग
हंग कर्ड यानी गाढ़ा दही प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स का शानदार स्रोत है।
कैसे तैयार करें?
दही को कपड़े में बांधकर उसका पानी निकाल दें। फिर इसमें ड्राई फ्रूट्स और फल मिलाएं।
फायदे:
- पेट के लिए अच्छा
- आंतों की सेहत सुधारता है
- ठंडा और हल्का नाश्ता
7. सत्तू पराठा
प्रोटीन: 15–17 ग्राम प्रति पराठा
सत्तू को “गरीबों का प्रोटीन” कहा जाता है। यह बिहार और पूर्वी भारत का पारंपरिक सुपरफूड है।
फायदे:
- शरीर को ठंडक
- गर्मियों में बेहतरीन
- लंबे समय तक भूख नहीं लगती
8. मूंगफली पोहा
प्रोटीन: 11–13 ग्राम प्रति सर्विंग
पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। जब इसमें मूंगफली मिलाई जाती है तो इसका प्रोटीन स्तर काफी बढ़ जाता है।
फायदे:
- जल्दी बनने वाला
- बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए सही
- स्वाद और पोषण का संतुलन
निष्कर्ष
इन सभी विकल्पों से यह साफ हो जाता है कि प्रोटीन से भरपूर नाश्ते के लिए हमें किसी महंगे या विदेशी भोजन पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है। हमारे पारंपरिक भारतीय नाश्ते ही स्वाद, पोषण और सेहत — तीनों का बेहतरीन संतुलन प्रदान करते हैं।
अगर हम रोज़ सुबह अपने नाश्ते में सही मात्रा में प्रोटीन शामिल करें, तो न केवल शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि दिनभर ऊर्जा भी बनी रहेगी।